नीतिश और भाजपा की नई सरकार में कई बड़े चेहरे को उनकी ईमानदारी का इनाम मिला है। लेकिन, अभी भी इनकी वफादारी का सही हक बेहतर ढंग से नहीं मिल पाया है। अभी इनमें से कुछ को बोनस मिलना बाकी है इस बात की भी चर्चा तेज है।

दरअसल, नई सरकार के गठन के साथ ही जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को पहले ही दिन नीतीश कैबिनेट में जगह मिल गई है। मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को मंत्री बनाया गया है। यह मांझी की वफादारी का इनाम है। तमाम कयासों को दरकिनार कर मांझी एनडीए की डगमगाती नाव को संभाले रहे। अब मांझी की नजर बोनस पर है। यह बोनस एक और मंत्री पद है या उनका खुद का राज्यसभा जाना बताया जा रहा है। जिसकी उम्मीद मांझी लगाए बैठे हैं।

जीतन राम मांझी पिछली एनडीए सरकार का भी हिस्सा थे मगर तब और अब में काफी कुछ बदल गया है। तब मांझी एनडीए में जरूर थे मगर उनका गठबंधन नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से था। जदयू ने अपने कोटे से संतोष सुमन को जबकि भाजपा ने अपने कोटे से मुकेश सहनी को मंत्रिमंडल में जगह दी थी।इस बार की एनडीए सरकार में मांझी भाजपा के करीब हैं। कह भी चुके हैं कि जहां मोदी, वहां मांझी।

ऐसे में मांझी को उम्मीद है कि नई सरकार के गठन के बाद उन्हें एक और बोनस जरूर मिलेगा।

जीतन राम मांझी की पार्टी हम की सरकार में करीब सात महीने बाद वापसी हुई है। मांझी महागठबंधन की सरकार का भी हिस्सा थे मगर पिछले साल जून में पार्टी विलय की शर्त न मानने पर संतोष कुमार सुमन ने मंत्रीपद छोड़ दिया था। इसके साथ ही पार्टी ने नीतीश कुमार से अपना समर्थन भी वापस ले लिया था।

इसके कुछ ही दिन बाद मांझी भाजपा के खेमे में आ गए थे। अब मोदी के साथ आने से बड़ा फायदा हुआ है उन्हें पहले गिफ्ट तो मिल गई है अब जल्द ही बोनस भी मिलने वाली है और इस बात की चर्चा काफी तेज है लेकिन फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। वैसे भी बिहार की राजनीति में किसी भी बात की आधिकारिक पुष्टि शायद ही कभी की जाती हो। ऐसे में यह बात है कि मोदी को फिर से मांझी को कोई ना कोई बोनस जरूर देना होगा।