किसान आंदोलन के सवाल पर बोले सीएम नीतीश, बिहार में अन्नदाताओं को धान बेचने में नहीं होगी परेशानी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि बिल से किसानों के फसलों की खरीद में कोई बाधा नहीं होगी। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए निर्धारित लाभ किसानों को मिलेगा। केंद्र सरकार किसानों से बातचीत करना चाहती है। जब केंद्र सरकार और किसानों के बातचीत होगी तो उन्हें सही मायने में पूरी जानकारी मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि बिल से किसानों के फसल खरीद में कोई कठिनाई नहीं होने वाली है। किसानों में अकारण गलतफहमी पैदा की जा रही है।

मुख्यमंत्री सोमवार को दीघा-एम्स एलिवेटेड सड़क के लोकार्पण के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। किसान आंदोलन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि पहले से ही वर्ष 2006 में बिहार में किसानों के हित में इस तरह की व्यवस्था लागू की गई है। अब यह व्यवस्था पूरे देश में लागू की गई है। बिहार में यह व्यवस्था लागू होने से किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई है। बिहार इसका उदाहरण है। यहां किसानों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो रही है और अनाज खरीद का कार्य चल रहा है। इस वर्ष 30 लाख टन से ज्यादा धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है।

किसान आंदोलन के समर्थन में एकजुट हुईं लेफ्ट पार्टियां
केन्द्र सरकार द्वारा किसानों पर दमन का आरोप लगाते हुए तीन वाम दल एकजुट हो गये हैं। दो दिसम्बर को केन्द्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में ये तीनों दल शामिल होंगे। सीपीएम कार्यालय में माकपा, भाकपा और माले दलों ने सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर यह घोषणा की। वामपंथी दलों ने अपील की है कि दो दिसम्बर को बड़ी संख्या में संघर्षरत किसानों के समर्थन में बाहर निकल कर उनके उपर हो रहे दमन के खिलाफ प्रतिरोध एवं संघर्ष के साथ एकजुटता प्रदर्शित करें।

वामदल के नेताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कोरोना के दौर में तमाम जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को तिलांजलि देते हुए बिनाशकारी कृषि कानूनों को देश पर थोप दिया है। संसद से लेकर खेतों खलिहानों तक इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक स्तर पर प्रतिरोध हो रहा है। पिछले दो महीनों से किसान आन्दोलनरत है। सरकार की हठधर्मिता से आजिज आकर किसानों ने दिल्ली को जोड़ने वाले तमाम उच्च पथों को जाम कर दिया है। वे शान्तिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रखने के लिये रामलीला मैदान या जंतर मंतर जाना चाहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कानूनों की तारीफ कर किसानों के जले पर नमक छिड़क दिया।

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