बिहार में नये सब स्टेशनों का होगा निर्माण, विद्युत उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ेगी
पटना। राज्य के दो सौ से अधिक सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इससे गर्मी के दिनों में लोड बढ़ने पर ट्रिपिंग की समस्या दूर होगी। लोगों को निर्बाध बिजली मिलेगी। इसके अलावा नए तार बिछाए जाएंगे। पुराने व जर्जर तारों को बदला जाएगा। कुछ जिले में नए सब-स्टेशन भी बनाए जाएंगे।
नए ग्रिडों को सब-स्टेशनों से जोड़ने के लिए 33 केवी के तार बिछाए जाएंगे। बिजली कंपनी ने इस मद में 856 करोड़ खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके तहत दक्षिण बिहार में 558 करोड़ तो उत्तर बिहार में 298 करोड़ खर्च होंगे। जानकारी के अनुसार राजधानी पटना के अलावा नालंदा, नवादा व गया में बिजली की मांग बढ़ी है। इसे देखते हुए कंपनी ने सात नए सब-स्टेशन बनाने का निर्णय लिया है। इसमें से दो सब-स्टेशन गैस इंसुलेटेड बनाए जाएंगे। इस प्रणाली में कम जगह में ही सब-स्टेशन का निर्माण हो जाया करता है। इस मद में 120 करोड़ चार लाख खर्च होंगे। दक्षिण बिहार में कई नए ग्रिड बने हैं। अब इनको चालू करते हुए सब-स्टेशनों से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 33 केवी के 41 नए लाइन बिछाए जाएंगे। इस मद में 171 करोड़ 71 लाख खर्च होंगे। दक्षिण बिहार में जर्जर तारों की पहचान कर उसे बदलने का निर्णय लिया गया है। कंपनी ने 33 केवी लाइन का 78 नए तार बिछाने का निर्णय लिया है। इस मद में 105 करोड़ खर्च होंगे।
कंपनी ने दक्षिण बिहार में 57 सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। इन सब-स्टेशनों में पांच एमवीए के बदले 10 एमवीए का पावर ट्रांसफॉर्मर लगाया जाएगा। 23 सब-स्टेशनों में 10 एमवीए का अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर लगेंगे। वहीं उत्तर बिहार के 123 सब-स्टेशनों की पहचान की गई है। दक्षिण बिहार में बनाए गए नए ग्रिडों को सब-स्टेशनों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 33 केवी के 16 नए तार बिछाए जाएंगे। इससे पहले से बिछाए गए तारों पर लोड कम होगा। इस मद में 52 करोड़ 98 लाख खर्च किए जाएंगे।
प. चंपारण के 25 गांवों को ग्रिड से मिलेगी बिजली
नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अधीन पश्चिमी चम्पारण के 25 गांवों को ग्रिड से बिजली मिलेगी। इससे इन गांवों के 11 हजार 798 घरों को तार-पोल से बिजली मिलेगी। अभी इन गांवों में सौर ऊर्जा की आपूर्ति हो रही है। लेकिन सोलर प्लेट में खराबी आजाने से लोगों को परेशानी हो रही है। शुरुआत में लोगों को छह से आठ घंटे बिजली मिलती थी जो अब कम होकर दो से तीन घंटे हो गई है। ग्रिड से बिजली आपूर्ति करने के मद में 139 करोड़ चार लाख खर्च होंगे। केंद्र प्रायोजित इस योजना में बिहार को केंद्र सरकार से 60 फीसदी राशि मिलेगी। हालांकि केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 100 करोड़ 28 लाख की ही मंजूरी दी है। इस कारण बिहार को इस योजना में केंद्र सरकार से मात्र 60 लाख 17 हजार ही मिल सकेगा। बाकी राशि 78 करोड़ 87 लाख बिहार सरकार वहन करेगी।
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