शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक लगातार स्कूलों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं. जिससे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के बीच केके पाठक को लेकर दहशत बनी हुई है . बता दें कि प्रधान शिक्षक के मेडिकल लीव पर जाने के बाद कोई भी शिक्षक उनका कार्यभार लेने से कतरा रहा है . सभी सीनियर टीचर एक-दूसरे पर ये जिम्मेदारी थोपना चाहते हैं . जबकि पहले ऐसा आलम था कि प्रभारी बनने के लिए लड़ाई होती थी।
हालांकि केके पाठक का डर इस कदर हो गया है कि विद्यालय के प्रभारी अब अपना पद छोड़कर भागने लगे हैं . यहां तक की टीचर अब जवाबदेही वाला कोई पद नहीं लेना चाहते हैं. बता दें कि एक मामला डुमरिया के उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है . यहां सेवानिवृत्त प्रधान शिक्षक सहदेव साव मेडिकल लीव पर गए हैं. जिसके बाद विद्यालय का कोई शिक्षक उनका कार्यभार नहीं संभालना चाहता है . सीनियर टीचर होने के नाते संजीत प्रसाद को विद्यालय का प्रभार लेना था लेकिन संजीत प्रसाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर विद्यालय का चाभी थमा कर गायब हो गए. वहीं विद्यालय की महिला टीचर आभा चौधरी भी प्रभार लेने से मना कर दिया . बता दें कि किसी के प्रभार नहीं लेने से 31 जुलाई से विद्यालय में ताला बंद है।
विद्यालय में ताला बंद होने से बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल रहा है. बता दें कि विद्यालय के अन्य शिक्षक उमेश कुमार और मसूदन प्रसाद ने शिक्षा पदाधिकारी से की इसकी लिखित शिकायत है. लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है . शिक्षकों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के वजह से इलाके के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है . बता दें कि विद्यालय की जवाबदेही कोई लेना नहीं चाहता है. क्योंकि इन दिनों मुख्य सचिव केके पाठक विद्यालय का औचक निरीक्षण कर रहे है. जिसके डर से सीनियर शिक्षक होकर भी जूनियर शिक्षक की श्रेणी में रहना चाहते हैं।
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