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थ्रिलर सिनेमा के शौकीनों के लिए तापसी पन्नू का गिफ्ट, यहां जानिए कैसी है फिल्म

ByShailesh Kumar

Dec 9, 2022

लोग अक्सर बॉलीवुड पर यह आरोप लगाते हैं कि यहां नायिका को केंद्र में रखकर फिल्में नहीं बनाई जातीं। जो फिल्में बनती भी हैं तो बायोपिक होती हैं, लेकिन कुछ एक्ट्रेस इस टाइपकास्ट को तोड़कर नए प्रयोगों के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। उनमें से एक हैं तापसी पन्नू, जो एक के बाद एक ऐसी थ्रिलर फिल्में कर रही हैं जिनमें लीड किरदार महिला का है। तापसी ने बीते सालों में  ‘गेम ओवर’, ‘हसीन दिलरुबा’, ‘लूप लपेटा’ और ‘दोबारा’ जैसी कई थ्रिलर फिल्में दी हैं। अब एक तापसी पन्नू का थ्रिलर के दीवानों के लिए नया तोहफा है ‘ब्लर’, जिसमें वह डबल रोल में नजर आ रही हैं।

स्पेनिश फिल्म की रीमेक 

तापसी की फिल्म ‘ब्लर’ की एक खासियत यह भी है कि इसकी निर्माता भी खुद वही हैं। यह इसलिए कि शायद वह इसे अपने तरीके से बनाना चाह रही थीं। यह फिल्म स्पेनिश साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘जूलियाज आइज’ की हिंदी रीमेक है। फिल्म में तापसी पन्नू ने डबल रोल प्ले किए हैं, जिसमें वह दो जुड़वा बहनों गौतमी और गायत्री का किरदार निभा रही हैं।

बहन की मौत के बदले की कहानी

इस फिल्म की कहानी की बात करें तो यह नैनीताल शहर की दो बहनों पर आधारित है। जहां गौतमी (तापसी पन्नू) और गायत्री (तापसी पन्नू) नामक दो जुड़वा बहने रहती हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एक दिन गायत्री अपने पति नील  (गुलशन देवैया) के साथ बहन गौतमी के घर जाती है। लेकिन पहुंचने पर उसे बहन नहीं बल्कि फंदे से लटकता हुआ उसका शव मिलता है। पहली नजर में पुलिस इसे आत्महत्या करार देती है, लेकिन गायत्री अपनी बहन की मौत का सच जानने के लिए तड़प उठती है। गायत्री इस मामले में कुछ सुराग खोजती है तो उस पर भी जानलेवा हमला होता है, लेकिन वह बच जाती है। इसके बाद गायत्री का पति नील उसे एक राज बताता है जिसे सुनकर उसका पारा चढ़ जाता है। बहरहाल गायत्री सारी परिस्थितयों से लड़ते हुए इस मौत का रहस्य जानने के लिए लड़ती है। गायत्री के साथ भी वैसी ही घटनाएं घटने लगती है, जैसी घटनाएं उसकी बहन के साथ घटी थी। इस बीच वह कितना संघर्ष करती है और वह सफल होती है या नहीं यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

गायत्री की ब्लर होती जिंदगी 

पूरी कहानी में हम गायत्री की आंखों की परेशानी को भी महसूस करते हैं। क्योंकि डॉक्टर गायत्री को सलाह देते है कि अगर आंख का जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ, तो उसकी आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है। ज्यादा तेज प्रकाश उसकी आंखों के लिए खतरनाक है। फिल्म नाम ‘ब्लर’ भी गायत्री की इस परेशानी से रिलेट करता है, लेकिन ब्लर विजन के बाद भी जिस तरह से वह सच को खोजने में जुटी है यह देखना मजेदार है।

सिर्फ तापसी के कंधों पर टिकी फिल्म 

लेकिन पूरी फिल्म को देखते हुए यह जरूर लगता है कि पूरी कहानी तापसी अपने कंधों पर ढो रही हैं। ऐसे में तापसी की मजबूत अदाकारी इस फिल्म को बेहतर बनाती है, क्योंकि अगर तापसी कमजोर पड़तीं तो फिल्म बुरी तरह ढह जाती। गुलशन देवैया दमदार एक्टर होने के बावजूद भी फिल्म में ज्यादा स्क्रीन टाइम हासिल नहीं कर सके। डायरेक्टर उनकी प्रतिभा को उपयोग करने में नाकाम रहे हैं।

अजय बहल का निर्देशन करेगा निराश

‘बीए पास’, और ‘सेक्शन 375’ जैसी फिल्मों से तारीफ हासिल करने वाले अजय बहल ‘ब्लर’ में कुछ सुस्त नजर आए। डायरेक्शन में थ्रिलर फिल्म वाली कसावट की कमी दिख रही है। वहीं कई जगह फ्रेम की कमियां भी नजर आती हैं। कई जगह डायरेक्शन की कमी के चलते कहानी भटकी हुई भी प्रतीत होती है।

अंत में बात यही है कि कहानी ठीक है तापसी को एक्टिंग के पूरे नंबर मिलते हैं। लेकिन कहानी में लॉजिक और कसावट की कमी है, डायरेक्शन कहीं कहीं निराश करता है। बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म को आगे बढ़ने और दर्शक से जोड़े रखने में सपोर्ट करता है।