चारा घोटाले में आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सीबीआइ कोर्ट पहुंचे। दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले में सीबीआइ के विशेष कोर्ट में लालू पेश हुए। इसी मामले में पूर्व सांसद डा आरके राणा और पीएसी के पूर्व अध्यक्ष जगदीश शर्मा भी कोर्ट में हाजिर हुए। इस मौके पर झारखंड के राजद प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी, पूर्व विधायक संजय सिंह यादव और बिहार के भोला यादव कोर्ट में लालू से मिले।

 

जज से बोले लालू, सर-वीडियो कांफ्रेंसिंग से नहीं; कोर्ट में ही आ जाएंगे

 

चारा घोटाले के दो मामलों में वीरवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित अन्य आरोपी सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किए गए। वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से डोरंडा और दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में आरोपियों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से पेश किया गया। आरोपियों को सबसे पहले डोरंडा मामले में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में पेश किया गया और उसमें सीबीआइ की ओर से गवाही दर्ज की गई। इसके बाद दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले में आरोपियों की पेशी सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में हुई।

 

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के स्क्रीन पर उपस्थित आरोपियों का अदालत ने एक-एक कर नाम पुकारा। सभी ने यस सर, जी सर कहते हुए हाथ उठाकर हाजिरी दी। हाजिरी के दौरान लालू प्रसाद ने हाथ जोड़कर जज को प्रणाम किया। अदालत ने आरोपियों से पूछा था कि कल (शुक्रवार) को आएंगे या वीसी से पेश होंगे। जज के सवालों पर लालू प्रसाद, डॉ. आरके राणा व कुछ अन्य आरोपियों ने कहा कि सर, कोर्ट में ही आ जाएंगे। कुछ आरोपियों ने वीसी से भी पेशी की इच्छा जताई।

 

 

 

यह मामला दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये अवैध निकासी से संबंधित है। मामले को लेकर चारा घोटाला कांड संख्या आरसी 38ए/96 के तहत प्राथमिकी दर्ज है।

 

तत्कालीन सहायक लेखापाल ने दी गवाही

 

डोरंडा मामले में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में चाईबासा कोषागार के तत्कालीन सहायक लेखापाल (लेखापाल के पद से सेवानिवृत्त) सुबोध चंद्र राउत ने गवाही दी। उन्होंने आइएएस व तत्कालीन फाइनेंस कमिश्नर फूलचंद सिंह से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोषागार पदाधिकारी सिलास तिर्की थे। उस समय सरकार के वित्त विभाग की ओर से पत्र आते थे, उसके बारे में न्यायालय को बताया गया है। सुबोध 447वें गवाह के रूप में गवाही देने पहुंचे थे।

 

यह मामला डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये अवैध निकासी से संबंधित है। मामले को लेकर चारा घोटाला कांड संख्या आरसी 47ए/96 के तहत प्राथमिकी दर्ज है। अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि शुक्रवार निर्धारित की थी। मामले में लालू प्रसाद, डॉ. आरके राणा, जगदीश शर्मा सहित अन्य आरोपियों को पेश किया गया था।

 

जज और लालू के बीच संवाद के रोचक पहलू

 

सीबीआइ कोर्ट में जज और लालू के बीच बुधवार को हुए संवाद के रोचक पहलू के मुख्य अंश इस प्रकार रहे।

 

लालू : अच्छा तो एक और भी ममलवा है न सर, देख लीजिएगा, उसमें तीन वर्ष ही सजा कीजिएगा। बेल मिल जाएगा। बाकी वाला का फैसला भी जल्दी कर दीजिए सर।

 

जज : हमने सजा के लिए लिमिट बनाया था। हम जजमेंट में सजा लिखकर नहीं रखे थे। माइंड में तीन कैटेगरी बनाकर रखे थे और सजा सुना दी।

 

लालू : कोर्ट में आने में धक्का-धुक्की होती है।

 

 

 

जज : बोलिए न कहां खाली कराना है। आपको इतनी सुरक्षा दी गई है। कोर्ट परिसर में तो आपके कार्यकर्ता ही रहते हैं।

 

जज : आपलोग को ओपन जेल में रखने के लिए अनुशंसा किया हूं। वहां सभी सुविधा है। शौचालय से लेकर कमरा व टीवी तक है। अक्टूबर में हम वहां गए थे। स्थिति खराब हो रही है। आपलोग वहां रहेंगे तो उसकी भी व्यवस्था सुधर जाएगी। फालतू में यहां अपराधियों के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि एक अधिवक्ता ने पूछा कि कठोर सजा सुनाई गई है कि साधारण। हमने कहा कि कठोर में पैसा मिलता है, साधारण में नहीं। इनको पैसे की क्या जरूरत है। इनको भी रहना चाहिए। परिवार के साथ रहेंगे। खाना परिवार बनाएगी और आपलोग खाएंगे।

 

लालू : ओपन जेल का नियम अलग है। हुजूर, जेल मैनुअल पढ़ लीजिए। उसके नियम भी पढ़िए। सात वर्ष से कम सजा वालों के लिए नहीं है। वह तो नक्सलियों के लिए बना है या जो आधा सजा काट चुके हैं उनके लिए। हमलोग जन नेता हैं। रांची जेल में मिलने की सुविधा दिला दीजिए। ओपन जेल में रखेंगे तो पूरे झारखंड के फोर्स को लगाना पड़ेगा। कम से कम 20 हजार फोर्स लगाना पड़ेगा। हमलोग भाग जाएंगे तो नरसंहार हो जाएगा। सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है।

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