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दीपावली पर बच्चों का रखें खास ख्याल, साथ रहें और अकेले में नहीं चलाने दें पटाखे

दीपावली में बच्चों का रखें ख्याल। बच्चों को अकेले में नहीं फोड़ने दें पटाखे। इससे बच्चों को पटाखे से झुलसने का खतरा रहता है। अकेले में बच्चे पटाखे फोड़ने में हाथ से दूरी नहीं बनाते हैं। ऐसे में जलने का खतरा हो सकता है।
जी हां, सदर अस्पताल के बच्चा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरकुंवर सिंह ने दीपावली पर बच्चों को पटाखे से दूर रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे को पटाखे से झुलसने की स्थिति में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी खास वजह है कि बच्चों का अंग काफी कोमल होता है। इस कारण बच्चों को जलने की स्थिति में काफी जलन महसूस होती है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को पटाखे फोड़ने में दूरी तो बनाए रखना ही चाहिए। इनके अलावा ज्यादा आवाज वाले पटाखे फोड़ने के दौरान बच्चों को काफी दूर रखना चाहिए। आवाज वाले पटाखे से बच्चों के कान के पर्दा पर असर पड़ता है। इससे वह घायल हो सकता है और स्थायी रूप से कम सुनने की परेशानी बन सकती है। ऐसे में बच्चे डिप्रेशन के शिकार भी हो सकते हैं। पटाखे की आवाज से पशु-पक्षी को रात्री में काफी दिक्कत महसूस होती है।

रोशनी का पर्व है दीपावली
चिकित्सक डॉ. वीरकुंवर सिंह बताते हैं की दीपावली रोशनी का पर्व है। इस पर्व को ज्यादातर रोशनी के रूप में दीप और सामग्री का उपयोग कर रोशनी पर्व के रूप में मनाना चाहिए। इससे इस पर्व का उल्लास और शांति बनी रहती है। लोगों को झुलसने से बचना चाहिए। बच्चों को पटाखा से बचा कर रखें। अक्सर देखा जाता है कि शाम में पटाखे फोड़ने से झुलसे रोगी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। इससे लोगों की खुशी में अड़चनें आती हैं।
सड़कों पर न फोड़ें पटाखे
दीपावली में सड़कों पर पटाखे न फोड़ें। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। चिकित्सक बताते हैं कि सड़कों पर पटाखे फोड़ने के दौरान उसके तेज आवाज से कभी-कभी बाइक सवार गिर पड़ते हैं या फिर पटाखे के शिकार हो जाते हैं। इससे सड़क दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। इसलिए पटाखे फोड़ने के लिए खाली जगह या फिर वैसे स्थल जहां आने-जाने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, उन जगहों पर पटाखा फोड़ें।
हर्ट की रोगी का भी रखें ख्याल
पटाखा फोड़ने में वैसे किसी भी रोगी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मगर हर्ट के रोगी के लिए पटाखा की तेज आवाज मौत का कारण बन सकती है। इस रोगी की मनोदशा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए पटाखे को फोड़ने में कई चीजों का ध्यान जरूर रखें। ताकि ऐसे लोग पटाखे की चपेट में न आयें और खुशी का क्षण गम में न बदल जाए।

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