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नदियों-तालाबों में को प्रदुषित कर खुद को मौत के मुंह में डाल रहे – जयराम विप्लव

नदियों का जीवन खतरे में है । या यूं कहे तो पृथ्वी पर जीवन ही खतरे में आ गया है । एक तरफ सिंचाई से लेकर पीने के पानी का घोर संकट है तो दूसरी तरफ मुम्बई जैसे अनेक शहर बारिश की बाढ़ से तबाही झेल रहा है । जलवायु परिवर्तन का यह दुष्परिणाम हमारी लापरवाह जीवन शैली और स्वार्थी सोच के कारण उत्पन्न हुआ है । उक्त बातें युवा ट्रस्ट के अध्यक्ष जयराम विप्लव ने एक वार्ता में कहा ।

विप्लव ने कहा कि पर्यावरण की इस वैश्विक समस्या से अपना मुंगेर क्षेत्र भी अछूता नहीं है । वेदों में वर्णित बदुआ नदी और उसकी शाखा चौरा नदी आज मरणासन्न अवस्था में है । बदुआ में बालू के दोहन से जल स्तर ख्त्म हौ गया है तो चौरा नदी को इलाके भर के कूडा निस्तारण का साधन बना दिया गया है । आज नदी में पानी की जगह पौलिथिन ही पौलिथिन नज़र आता है । जिससे न केवल जल संकट पैदा हुआ है बल्कि बरसात में यही पानी खेतों की सिंचाई में उपयोग होता है जिससे मिट्टी प्रदुषित होकर जहरीले अनाज पैदा कर रही है जो कैन्सर और लीवर जैसे जानलेवा रोगों को फैला रहा है । यकीन न हो तो अपने आसपास तेजी से फैलते इन बिमारियों पर ध्यान दीजिये ।
यही नहीं क्षेत्र में 20-25 सालों में दर्जनों तालाब में कूडा-कर्कट भरकर मकान बना दिये गये । अनवरत तालाबों का अतिक्रमण और प्रदुषन जारी है । गांव-मोहल्ले की नालियाँ तालाब और नदियो में गिर रही है । भोज-भात में प्रयोग किये ज्ञए थर्मोकॉल और प्लास्टिक के ग्लास-प्लेटों ने तो स्थिति को भयावह बना दिया है । ऐसे भी रोजमर्रा के जीवन में एक घर से औसतन तीन दिन में एक बाल्टी प्लास्टिक कचड़ा निकलता है तो इन्हीं जलस्रोतों में फेंका जाता है तो वहीं खाली जमीन देखकर भी कूडे का ढेर लगाने की प्रवृति देखने को मिल रही है । निगम क्षेत्रों मे तो थोडा बहुत कचड़ा प्रबधन भी होता है परन्तु बाकी जगहों पर मनमाना रवैया चल रहा है । आम लोग अपने ही हाथों अपने जीवन को संकट में डालकर भी अंजान हैं तो सरकारी तन्त्र को अपनी जिम्मेदारी का अह्सास तक नहीँ है । जनप्रतिनिधि तो पर्यावरण को कोई मुद्दा ही नहीँ मानते । कुल मिलकर स्थिति आने वाले समय में और खतरनाक होती जायेगी ।
विप्लव ने कहा कि जल स्रोतों के प्रदुषन को लेकर हमें आम लोगों को जागरुक करना है और प्रशासन को कूडा निस्तारण की समुचित व्यवस्था के लिये मस्टर प्लान बनाते हुए उसे अंजाम तक पहुंचाना होगा । सबसे पहले तो तारापुर शहर के किनारे चौरा नदी में कूडा फेंकना बंद हो । इसके लिये युवा ट्रस्ट एक अभियान शुरु करने जा रहा है । किसी भी हाल में जलस्रोतों से कचड़ा हटाना होगा । साथ ही ऐसा करने वालों को दण्डित करने के लिये बिहार सरकार को कानुन बनने का प्रस्ताव भी भेजा जायेगा ।

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