बिहार के जेल अब पेपरलेस होने जा रहे हैं। बिहार देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जहां जेलों के कामकाज कम्प्यूटराइज्ड होंगे। कैदियों से लेकर जेल के अधिकारियों और कर्मियों तक का रिकॉर्ड कम्प्यूटर पर होगा। यहां तक की कैदियों से मुलाकात के लिए आने-वाले व्यक्तियों का भी डाटा बनेगा।
ई-प्रिजन योजना के तहत जेलों के कामकाज को पेपरलेस बनाने के लिए इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) प्रणाली राज्य के सभी जेलों में लागू की जा रही है। यह एक अत्याधुनिक सिस्टम है, जिसमें जेलों के सभी कामकाज को कम्प्यूटराइज्ड किया जाएगा।
बता दें कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आदर्श केन्द्रीय कारा बेउर में 2013 में ERP शुरू की गई थी। इसकी सफलता के बाद राज्य के अन्य 55 जेलों में इसे लागू किया जा रहा है। 507 पदों पर संविदा आधारित बहाली की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 15 नवम्बर को इसका उद्घाटन करेंगे।

क्या है ERP सिस्टम
ईआरपी प्रणाली से न सिर्फ जेलों के कामकाज बेहतर तरीके से निपटाए जाएंगे, बल्कि कैदियों का डाटा भी कम्प्यूटराइज्ड होगा। एक क्लिक पर कैदियों का पूरा डाटा किसी की जेल में देखा जा सकेगा। कम्प्यूटर पर लोड होने वाले कैदियों के डाटा को ऑनलाइन भी देखा जा सकेगा। प्रिजन मैनेजमेंट सिस्टम के अलावा इसमें गेट, प्रिजन एकाउंट, वेजेज, आर्म्स एंड एम्यूनेशन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम आता है। इसके तहत जेल में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का डाटा होगा।
पदाधिकारियों और कर्मियों का पूरा ब्योरा, जेल के अकाउंट का लेखा-जोखा, कैदियों के पारिश्रमिक का हिसाब-किताब के साथ सुरक्षाकर्मियों के पास मौजूद हथियार और गोलियों का पूरा डाटा कम्प्यूटर में अपलोड होगा। कैदी कब जेल अस्पताल में गए, उन्हें क्या बीमारी थी और किस तरह की दवाएं दी गईं इसका भी डाटा होगा, ताकि दोबारा भर्ती होने पर उसका इलाज बेहतर ढंग से हो।
इस तरह अपराध पर लगेगी लगाम
ईआरपी सिस्टम के तहत प्रिजन मैनेजमेंट की भी व्यवस्था है। इससे अपराध पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी। इसके तहत कैदियों के फोटो और अंगुलियों के निशान के साथ आवाज के नमूने भी लिए जाएंगे। यह काम शुरू किया जा चुका है। घटनास्थल से मिले अंगुलियों के निशाने के अलावा फोन से धमकी देने के मामले में आवाज के नमूने का मिलान कर अपराधी की पहचान की जा सकती है।

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