बिहार : प्रदेश में तैयार हो रही साइबर क्रिमिनलों की नर्सरी

पटना : मुंगेर के अवैध असलहे, ‘अपहरण उद्योग’ और प्रतियोगी परीक्षाओं में रंजीत डॉन की तगड़ी सेटिंग की धार बिहार में भले ही कुंद हो गयी हो पर साइबर क्रिमिनल्स की नयी पौध ने देश भर में हलचल मचा दिया है. ‘साइबर ठगी उद्योग’ की जड़ें बिहार से 10 राज्यों तक पहुंच चुकी है.
बिहार में बैठ कर हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक तक घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है. सभी 10 राज्यों की पुलिस बिहार पुलिस के लगातार संपर्क में है. बिहार पुलिस भी अपनी विशेष टीम को लगातार राज्य से बाहर भेज कर जांच-पड़ताल करा रही है.

अलग-अलग तरीकों से होनेवाली ऑनलाइन ठगी की सैकड़ों घटनाएं हो रही हैं. बाकायदा इसके लिए नालंदा और शेखपुरा में पाठशाला चल रही है और इसके ‘खलीफा’ साइबर ठगी के लिए क्रिमिनल की नर्सरी तैयार कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो साइबर ठगी करने के लिए 6 दिन की ट्रेनिंग दी जा रही है. बिहार पुलिस ने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कुछ गिरफ्तारियां की थीं, लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हुए. हाल में पकड़े गये अपराध के आधार पर बिहार के साइबर क्रिमिनल झारखंड के जामतड़ा और मध्य प्रदेश के टिकमगढ़ में अपनी शाखाएं चला रहे हैं.

10 राज्यों में जड़ें हो चलीं हैं गहरी

भाषा की भी दी जा रही ट्रेनिंग: फोन पर ठगी करने वालों को दूसरे राज्यों की भाषा की ट्रेनिंग भी इस पाठशाला में शामिल होने वाले अपराधियों को दी जा रही है. भाषा को तोते की तरह रट्टा मरवाया जा रहा है, ताकि दूसरे राज्यों में बैठे लोगोें को ठगा जा सके. अपराधियों द्वारा कभी बैंक अधिकारी बनकर एटीएम का पासवर्ड पूछा जाता है तो कभी लकी ड्रॉ का विजेता बता कर इनाम दिलाने की बात कही जाती है. इनाम की रकम करोड़ों में बताकर मार्जिंग मनी के रुप में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं.

फर्जी आईडी पर सिम और फर्जी होते हैं बैंक खाते : साइबर ठगी करने वालों की तैयारी बहुत ही पुख्ता है. यह लोग सुदूर इलाके में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाकर कॉल करते हैं. जिस नंबर से फोन किया जाता है वह गैंग द्वारा तैयार किये गये फर्जी आईडी पर लिया गया होता है. इसलिए नंबर ट्रेस होने के बाद भी कोई पकड़ में नहीं आता है. जिन बैंक एकाउंट में पैसा मंगाया जाता है, वह भी फर्जी नाम पते पर खोला जाता है. पैसा खाते में आते ही उसे निकाल लिया जाता है.

पकड़े गये अपराधी का कबूलनामा

साइबर क्रिमिनलों ने अपना अड्डा दुर्गम इलाके में बनाया है. यहां सड़कें खराब हैं. यहां के अपराधी प्रवृत्ति के लोग पुलिस की पहुंच से बचने के लिए लोगों को भड़का कर रखते हैं. सूत्रों की मानें तो यहां ठेकेदार को सड़क बनाने से रोका जा चुका है. कतरीसराय से पकड़े गये संत चौधरी ने कबूल किया था कि 10 कॉल करने के लिए नये अपराधियों को 200 रुपये दिए गये थे, जिनमें दो लोग गिरोह के शिकार बने थे.

साइबर क्राइम के लिए कुख्यात बन चुके ये इलाके

दूसरे राज्यों की पुलिस को साइबर मामलों से जुड़े अपराध की छानबीन में अपराध में इस्तेमाल हुए मोबाइल फोन के लोकेशन बिहार के कुछ खास इलाकों के मिले हैं. इसमें नालंदा जिले के कतरीसराय, वरीथ, गोर्वधनबिघा, लासरपुर, बहादुरगंज, मायापुर, बंचलाबाघा और शेखपुरा जिले में रहिया, कबीरपुर, पाची और पार्वती गांव शामिल हैं. यहां साइबर क्राइम एक उद्योग बनकर उभरा है. यहां के करीब 90 प्रतिशत अपराधी इस धंधे में शामिल हैं.

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