Advertisements

बिहार में सीटों पर सियासी दंगल जारी, उपेंद्र कुशवाहा और रामविलास पासवान के ‘फॉर्मूले’ से कहीं टूट न जाए NDA !

पटना :-लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बिहार में एनडीए के लिए राह आसान नहीं है. बीते कुछ समय से एनडीए में सीट बंटवारों को लेकर माथापच्ची जारी है, मगर अब ऐसी खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के बाद अब रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा भी 2014 चुनाव के मुकाबले कम सीटों पर मानने वाली नहीं है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने गुरुवार को यह स्पष्ट कर दिया कि 2014 चुनाव के समान ही लोकसभा चुनाव 2019 में उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी और जेडी (यू) बिहार में कुल 40 सीटों में से 34 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं. उसके बाद जो सीटें बचती हैं, उसमें से लोजपा और रालोसपा के बीच बंटवारा होगा.

दरअसल, रालोसपा और लोजपा का सीटों को लेकर अपना एक अलग फॉर्मूला है. रालोसपा और लोजपा का अपना फॉर्मूला यह है कि दोनों पार्टियां 2014 के चुनाव के मुकाबले कम सीटों पर 2019 में नहीं लडऩा चाहती हैं. दोनों पार्टियां चाहती हैं कि उन्हें 2014 में जितनी सीटें मिली थीं, कम से कम इस बार भी उतनी ही सीटें मिले. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी में बीजेपी ने 22 सीटें जीती थीं. वहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास की पार्टी लोजपा 7 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें से 6 सीटों पर उसकी जीत हुई थी. इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा की पार्टी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीटें अपने नाम की थी.

लोजपा के बिहार इकाई के प्रमुख और राज्य में मंत्री पशुपति पारस ने उन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह बताया जा रहा है कि लोजपा और रालोसपा आगामी लोकसभा चुनाव में अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच हुए फिफ्टी-फिफ्टी सीट शेयरिंग की सहमति के बाद अपनी सीटों की कुर्बानी देगी. उन्होंने अपनी सीटें कम करने की बात को हवा हवाई करार दिया.

रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस ने कहा कि जब तक तब तक सीट शेयरिंग की बात पूरी नहीं होगी, जब तक सभी चार एनडीए गठबंधन सहयोगियों – बीजेपी, जेडी (यू), एलजेपी और आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक साथ बैठकर बातचीत नहीं कर लेते. हालांकि, अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और बिहार में सीट शेयरिंग पर जो भी मीडिया में दिख रहा है, वह हवा-हवाई बातें हैं.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जाहिर सी बात है कि हम कम से कम सभी सात सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेंगे. हम पिछले चुनाव में सात में से 6 सीटों पर चुनाव जीते थे और एक सीट महज सात हजार वोटों के अंतर से हारे थे. पिछले लोकसभा चुनाव से हमारा ग्राफ नीचे नहीं गया है. इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम कम सीटों पर चुनाव लड़ें.

उन्होंने बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर के सीट शेयरिंग फार्मूला पर कहा कि 50-50 फॉर्मूला का मतलब कुछ भी हो सकता है. इसका संकेत तो यह भी हो सकता है कि कि बीजेपी और जेडी (यू) केवल 10-10 सीटों लड़ेंगे, शेष 20 अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ देंगे. वहीं, रालोसपा का कहना है कि वह एनडीए में तीन सीटों से कम पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी. यानी रालोसपा को तीन सीट से कम मंजूर नहीं.

 रालोपसा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता माधव आनंद ने कहा कि तीन सीटों से कम पर सहमत होने का सवाल ही नहीं उठता. इस बात को कुशवाहा अमित शाह और भूपेंद्र यादव को भी कह चुके हैं. बता दें कि ऐसी खबरें हैं कि कुशवाहा को अगर एनडीए में सम्मानजनक सीटें नहीं मिलती हैं तो वह राजद के साथ भी जा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि बीते दिनों उनकी और तेजस्वी

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *