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भागलपुर:-लोकल पैसेंजर में यात्रियों की भीड़,बॉगी की संख्या कम,यात्री लटक कर जान जोखिम में डाल करते हैं यात्रा

भागलपुर : प्लेटफॉर्म नंबर एक पर जमालपुर-मालदा इंटरसिटी रुकी. ट्रेन से उतरने वालों की जितनी भीड़ थी, उससे कहीं चढ़ने वालों की भीड़ प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने के इंतजार में थी. ट्रेन जब पहुंची, तो इसमें चढ़ने-उतरने वाले यात्रियों के बीच मारामारी होने लगी. ट्रेन से उतरने वाले और चढ़ने वालों दोनों तरह के यात्रियों को जल्दी थी. इस बीच ही भीखनपुर के आशीष ने चढ़ने की कोशिश की, लेकिन उतरने वाले यात्रियों ने धक्का दे दिया और इसके बाद जो हुआ वह देखने लायक नजारा था.  भीड़ के बीच ही लात-घूंसे चलने लगे और वहां अफरातफरी मच गयी. यह घटना शनिवार शाम करीब 4.27 बजे पूछताछ केंद्र के ठीक सामने की बोगी के गेट पर हुई.  इस दौरान बीच-बचाव के लिए न तो कोई रेल पुलिस मौजूद थी और न ही कोई रेलवे का अधिकारी. आशीष ने बताया कि ट्रेन छूट न जाये, इसलिए रुकने के साथ बोगी में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन उतरने वाले यात्री ने दबंगई दिखाते हुये पहले धक्का देकर नीचे गिरा दिया और फिर पिटायी करने लगा. साथ में एक महिला थी, उन्होंने रेलवे की अव्यवस्था को खूब कोसा. यह तो एक मात्र उदाहरण है. इस तरह की घटनाएं यहां रोजाना होती हैं. हल के कुछ दिन पहले भीड़ के कारण वृद्ध महिला को रेल पुलिस ने ठेल-ठाल कर चढ़ा तो दिया, लेकिन साथ में वृद्ध बुजुर्ग प्लेटफॉर्म पर छूट गये थे. इसके बाद कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं थी. दोनों वृद्ध दंपती पर किया गुजरी होगी, इसका खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं. इस अव्यवस्था के पीछे दूसरा और कोई कारण नहीं, बल्कि लोकल ट्रेनों व बोगियों की संख्याएं नहीं बढ़ाया जाना है. ट्रेनें जब लेट होती हैं, तो भीड़ भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है.  लोकल ट्रेनों में बोगियां कम, मुश्किलें बढ़ीं  भागलपुर में लोकल ट्रेनों में सफर कुछ और मुश्किल ही है. इन दिनों साहिबगंज-जमालपुर के बीच चल रही विभिन्न लोकल ट्रेन में कोचों की संख्या 12 से 15 तक ही रह गयी है, लेकिन यात्रियों की संख्या हजारों में है.  साहिबगंज, जमालपुर, हंसडीह आदि शहरों के लिए लोकल ट्रेन की सुविधा अच्छी नहीं है. कोच की संख्या कम होने की वजह से ट्रेन के खड़े होने की पोजिशन भी बदल गयी है. ऐसे में ट्रेन आने पर प्लेटफॉर्म पर भगदड़ मच जाती है. बता दें कि केवल भागलपुर स्टेशन के बुकिंग काउंटर से रोजाना 15 हजार यात्रियों का टिकट कटता है और इससे रेलवे को 10 लाख से ज्यादा का रेवेन्यू प्राप्त होता है.

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