पुरातात्विक क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंची हाई लेवल टीम पर सोमवार को असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। घटना उस समय हुई जब टीम घोषीकुंडी पहाड़ी पहुंची थी। ग्रामीणों की भीड़ में शामिल कुछ लोग विरोध करते हुए टीम सदस्यों से हाथापाई पर उतारू हो गए।
टीम से बदसलूकी करने वालों का कहना था कि प्रशासन ने पहले पहाड़ को इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए चिह्नित कर दिया था, लेकिन पुरातत्व विभाग के संज्ञान लेने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। वे टीम के वापस जाने के नारे लगाते रहे। इसबीच असामाजिक तत्वों ने गाली-गलौज, धमकी और हाथापाई भी की। टीम के साथ गए विनोद कुमार हिमांशु को तो ग्रामीण घेर चुके थे। हालांकि अधिकारियों ने संयम दिखाते हुए किसी प्रकार लोगों को शांत किया और वहां से निकलने में कामयाब हुए।
इस उच्चस्तरीय टीम में युवा कला एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त सचिव आनंद कुमार भी शामिल थे। उनके साथ बिहार विरासत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजय चौधरी, पुरातत्व निदेशक डॉ अतुल कुमार वर्मा और विश्व भारती, शांति निकेतन के शिक्षक डॉ. अनिल कुमार भी शामिल थे।
पूर्व सूचना के बाद भी नहीं दी गई सुरक्षा
आश्चर्य की बात यह है कि पूर्व सूचना के बावजूद अधिकारियों को पहले दिन से ही किसी प्रकार की सुरक्षा या एस्कॉर्ट जिला और पुलिस प्रशासन ने उपलब्ध नहीं कराई थी।
डीएम, लखीसराय सुनील कुमार ने बताया कि सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लिखित रूप से मांग नहीं की गई थी। टीम की ओर से निरीक्षण के स्पॉट और रूट की भी जानकारी नहीं दी गई थी। घटना की सूचना मिली है, कार्रवाई होगी।
अशोक कुमार, एसपी, लखीसराय ने बताया कि घटना की सूचना मुझे फोन पर दी गई है। मैंने कहा कि लिखित रूप से संबंधित थाना में आवेदन देकर शिकायत करें। कानूनसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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