स्मार्ट सिटी की व्यवस्था फेल, डेढ़ साल में न पैसे खर्च, न काम हुआ

हर तीन माह पर दिखाना था काम सरकार ने अपना काम किया दिया 400 करोड़, पर आमजन को कोई लाभ नहीं

टीम बनी, बैठकें भी हुई, पर क्रियान्वयन लेवल पर फेल ही रह गयी परियोजना

 

भागलपुर : स्मार्ट सिटी परियोजना में भागलपुर में पिछले डेढ़ साल में सिर्फ नौ करोड़ ही खर्च हो पाया है, जबकि सरकार ने अब तक 379 करोड़ दे दिया है. बाकी राशि पड़ी हुई है. इसके बाद राशि मिलने के आसार भी नहीं दिख रहे. वजह प्रत्येक तीन माह पर खर्च का हिसाब देना है, लेकिन भागलपुर में राशि खर्च ही नहीं हो रही. इस कारण अगली राशि मिलनी फिलहाल मुश्किल है. छह माह बाद स्मार्ट सिटी में चयन होने का दो साल पूरा जायेगा. सवाल उठता है कि डेढ़ साल में नौ करोड़ खर्च करनेवाली स्मार्ट सिटी की टीम बचे हुए छह माह में कौन सा जादू की छड़ी घुमायेगी, ताकि सरकार को उपलब्धि दिखा सके. यह सवाल हर बीत रहे दिन स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के सामने मुंह बाये खड़ा है.

 

प्लानिंग बनानेवाली टीम भी नहीं : भागलपुर स्मार्ट सिटी परियोजना की प्लानिंग बनानेवाली टीम भी अभी इसके पास नहीं है. 30 मई को स्मार्ट सिटी की बैठक हुई थी. बैठक में लिये गये निर्णय पर कितना काम आगे बढ़ा, इसे जानने के लिए नौ जून को स्मार्ट सिटी के अध्यक्ष सह प्रमंडलीय आयुक्त ने बैठक बुलायी थी. आयुक्त को बताया गया कि प्लानिंग बनानेवाली एसपीवी के गठन के लिए विज्ञापन निकाल दिया गया है.

 

जिन मदों में नौ करोड़ खर्च हुए, उनमें कई चीजें बर्बाद : स्मार्ट सिटी के तहत अभी तक नौ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इसमें चार कांपैक्टर मशीनें खरीदी गयी. डस्टबीन खरीदा गया, जिसकी स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है. नगर निगम के गोदाम में कूड़ा रिसाइक्लिन प्लांट स्थापित किया गया, जो चालू ही नहीं हो सका.

इन शर्तों के बाद ही

वार्षिक किस्त मिलेगी

 

शहरी विकास मंत्रालय को प्रत्येक तिमाही का सिटी स्कोर कार्ड समय से प्रस्तुत करना

वास्तविक व वित्त की संतोषजनक प्रगति के लिए उपयोगिता प्रमाणपत्र व स्कोर कार्ड जमा करना

शहर में वर्तमान में चल रही योजनाएं

 

130 करोड़ की लागत से स्थापित होनेवाला कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के टेंडर की प्रक्रिया चल रही है. 23.7 किलोमीटर स्मार्ट सड़क के निर्माण को लेकर प्रक्रिया चल रही है. 34 करोड़ की लागत से स्थापित होनेवाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्लांट का टेंडर हो चुका है, 25 जून को इसका टेक्निकल बिड खुलेगा. सैंडिस कंपाउंड के भी सौंदर्यीकरण कराये जाने का निर्णय लिया गया है.

 

नौ जनवरी को ही प्रधान सचिव के तेवर हुए थे तल्ख : गत नौ जनवरी को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव ने भागलपुर की स्मार्ट सिटी परियोजना की समीक्षा की थी. इसमें पीडीएमसी के टीम लीडर उपस्थित नहीं हुए थे, जिस पर उन्हें शोकॉज हुआ था. बैठक में प्रधान सचिव ने निर्देश दिया था कि प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं की निविदा प्रकाशित की जाये. बावजूद इसके काम करने में ढिलाई है.

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