21 दिन की बच्ची और पांच माह के बच्चे को जाना पड़ा जेल, …

21 दिन की बच्ची और पांच माह के बच्चे को जाना पड़ा जेल, …

13th February 2018 0 By Deepak Kumar

शेखपुरा : प्रेम प्रसंग के विवाद में पुलिस अधिकारियों पर पथराव के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई ने पुलिस के अमानवीय चेहरे को उस वक्त सामने ला दिया जब एक मां अपने 21 दिन के नवजात पुत्री को देखने के लिए लालायित हो गई. वहीं पांच माह का लाडला लगभग 24 घंटे के बाद अपनी मां से मिला भी तो उसे जेल की सलाखों के पीछे कैद होना पड़ा.
पुलिस की इस कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीड़ित ग्रामीणों ने कहा कि इस घटना से जुड़े मामले में कोरमा थानाध्यक्ष, एसडीपीओ से लेकर शेखपुरा एसपी के रहते निष्पक्ष जांच नहीं की जा सकती है. इस मौके पर बेलौनी गांव के लगभग तीन दर्जन गांव का जायजा लेने के बाद लखीसराय जिले के पाली पंचायत के पूर्व मुखिया रामाश्रय महतो ने कहा कि 50 से अधिक घरों में पुलिस ने जबरन घुसकर न सिर्फ तोड़फोड़ मचाया. बल्कि बच्चे-बूढ़े महिलाओं को भी बर्बरतापूर्वक पिटाई की. इस घटना में दर्जनों ग्रामीण बुरी तरह जख्मी हो गये.

घटना के बाद पुलिस की बर्बरता से डरकर 70प्रतिशत लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने को विवश हैं. मौके पर एक दर्जन ग्रामीणों ने पत्रकारों से बातचीत में आपबीती बयां की. इस घटना में पुलिस कार्रवाई पर अगर नजर डालें तो 10 महिला समेत 37 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. वहीं 41 नामजद एवं 20 अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की कार्यवाही की गई है. इस घटना में प्राथमिकी अभियुक्तों को गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में प्रस्तुत करते हुए जेल भेज दिया गया. पटना में स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि कोरमा पुलिस कि यह कार्यवाही गांव के एक खास वर्ग को छोड़कर किया जाना निश्चित तौर पर पक्षपात को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे पक्षपात पूर्ण रवैया ही ग्रामीणों में आक्रोश का कारण बन गया.

सौर से खींच कर प्रसूता को गिरफ्तार करने का आरोप
सामाजिक रीति रिवाजों के मुताबिक प्रसव के बाद महिलाएं अपने नवजात बच्चे की बेहतर देखभाल के लिए 20 दिनों तक एक ही कमरे (सौर) में रहती है. शनिवार को बेलौनी गांव में प्रेम प्रसंग से उत्पन्न हुए विवाद और हिंसक झड़प की घटना के बाद जब ग्रामीणों का पथराव शुरू हुआ, तब पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी अभियान चलाया. इस अभियान पर सवाल खड़े करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि गांव में सुबोध महतो की पत्नी ने 21 दिन पूर्व पुत्री को जन्म दिया था. इसके बाद वह प्रसूता के रूप में सौर में ही रह रही थी. लेकिन गिरफ्तारी अभियान चला रही पुलिस ने उसे भी सौर से खींच कर गिरफ्तार कर लिया.
इस घटना में अपने 21 दिन के पुत्र को देखने के लिए जहां 24 घंटे तक लालायित मां आखिरकार पुत्री से मिले बिना ही जेल चली गयी. वहीं अपने पेट की भूख मिटाने के लिए नवजात चीत्कार मारता रहा. इसी प्रकार बबलू महतो की विवाहिता रेखा देवी भी पांच माह के पुत्र को देखने के लिए तरसती रही. न्यायालय में पेशी के दौरान इन दोनों महिलाओं को बच्चों को प्रस्तुत करने की भी सूचना दी गई. लेकिन कार्रवाई के भय से सुबोध महतो का परिवार 21 दिन की बच्ची को लेकर न्यायालय नहीं पहुंच सका. इस दौरान बबलू महतो का पांच माह के पुत्र को भी अपनी मां के साथ जेल भेजा गया.
स्कूली बच्चों की भी हुई पिटाई
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मणिलाल ने बिहार पुलिस की लिखित परीक्षा पास कर ली है. उसका फिजिकल एग्जाम होने वाला है. निर्दोष होने के बाद भी पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी कर ली. वही उच्च विद्यालय घाटकुसुंभा का मणिलाल कुमार होने वाले मैट्रिक परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र लेकर वापस घर लौट रहा था. लेकिन गांव में हुए घटना को वह नहीं समझ पाया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
न्याय के लिए हो ठोस पहल
बेलौनी गांव की घटना पर ग्रामीणों के साथ – साथ पूर्व मुखिया रामाश्रय महतो ने कहा कि पुलिस पर पथराव की घटना हो या उसके बाद ग्रामीणों पर गिरफ्तारी के लिए की गई कार्रवाई दोनों ही घटनाओं की जितनी निंदा की जाए कम होगा. मौके पर ग्रामीणों ने इस घटना के वास्तविक पहलुओं की जांच करने के लिए एक तरफ जहां सर्वदलीय स्वरूप में राजनीतिक पहल करने की ग्रामीणों ने मांग किया है. वहीं दूसरी ओर इसकी न्यायिक जांच कराने के लिए भी ग्रामीणों ने अपनी बात रखी है.

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