किसानों के समर्थन में हरियाणा के सभी विधायक इस्तीफा दें, नहीं तो गांवों में घुसने नहीं देंगे : अनूप सिंह चानौत

नए कृषि कानूनों के खिलाफ में दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 52वें दिन भी किसानों का हल्लाबोल जारी है। इस बीच हरियाणा के किसान नेता अनूप सिंह चानौत ने कहा है कि प्रदेश के सभी विधायकों की जीत में किसानों की मुख्य भूमिका रही है और किसान आंदोलन के समर्थन में सभी को अपने पदों से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

चानौत ने हिसार में जारी एक बयान में कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर कड़कड़ाती ठंड में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे किसानों को लगभग दो महीने होने जा रहे हैं। अगर विधायक इस आंदोलन में किसानों का साथ नहीं देंगे तो उन्हें गांवों में नहीं घुसने दिया जाएगा। चानौत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जननायक जनता पार्टी (JJP) के विधायकों को चेतावनी देते कहा कि इनके किसी भी विधायक को किसान जलसा या बैठक नहीं करने दी जाएगी। उन्होंने कि किसान केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी जंग अवश्य जीतेंगे।

गौरतल है कि नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई नौवें दौर की वार्ता भी एक बार फिर बेनतीजा रही। इस समस्या का समाधान तलाशने के लिए 19 जनवरी को 10वें दौर की बैठक होगी। बैठक के दौरान किसान नेता इन तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर टस से मस नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से समिति गठित करने के बाद भी किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

ज्ञात हो कि केन्द्र सरकार सितम्बर में पारित किए तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

 

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