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भागलपुर की सास-बहू ने दिल्ली में लगाया बिहारी तड़का, लोगों को खूब भा रहा लिट्टी-चोखा

ByRajkumar Raju

Oct 31, 2021

बिहार और बिहारी देश-दुनिया में अपने अलग अंदाज के लिए हमेशा से सुर्खियों में रहे हैं। बिहारी जहां-कहीं भी जाते हैं, छा जाते हैं। चाहे मेहनत से हो या ज्ञान और हूनर से। ये अपनी छाप छोड़ ही देते हैं। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या और कोई लेकिन आज हम बिहारी व्यंजन के स्‍वाद की बात करने जा रहे हैं। स्वाद की बात करें तो खुद पीएम मोदी को बिहार के लिट्टी-चोखा के मुरीद हैं।

अब लिट्टी-चोखा के स्वाद को बिहार के भागलपुर की सास-बहू दिल्ली वासियों के जुबां पर लगा रही हैं। स्वाद ऐसा कि जो एक बार इनके हाथों का बना बिहारी व्यंजन खाता है वो दोबारा उनके पास जरूर पहुंचता है। सास-बहू की जोड़ी देखने में जितनी खूबसूरत है, उससे भी कही ज्यादा इनके हाथ से लगे तड़के की महक है। तो चलिए जानते हैं आत्मनिर्भर इन दोनों के बारे में…

58 साल की हिरण्‍यमयी शिवानी और उनकी बहू मंजरी सिंह मूलरूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं। वे पूरे परिवार के साथ पिछले 10 साल से दिल्‍ली में रह रही हैं। लेकिन उन्‍होंने यहां पर जुलाई 2021 में अपने घर पर क्‍लाउड ‘द छौंक’ नाम से बिहारी स्‍ट्रीट फूड की शुरुआत की। देखते ही देखते इनके हाथों लगी लिट्टी-चोखा की तड़का की खुशबू लोगों तक पहुंच गई।

हिरण्‍यमयी शिवानी बताती हैं, कि वे पिछले एक दशक से दिल्‍ली में रहती हैं, लेकिन इसके बाद भी उनका बिहारी संस्‍कृति के प्रति लगाव कम नहीं हुआ। वहां की सभी व्‍यंजन उन्‍हें बहुत पसंद है। खासकर खिचड़ी, दाल-चावल, लिट्टी्-चोखा, झालमूड़ी, चूरा-मटर, खीर, दार पूड़ी, पुलाव आदि। लेकिन वे दिल्‍ली में उन्‍हें इसकी कमी खलती थी, बिहारी व्‍यंजन यहां मिलती जरूर है, लेकिन उसमें घर जैसी बात नहीं है। इस बात का उन लोगों ने अपने किचन में ध्‍यान रखा है। इसके लिए वे लोग तेल-मसाला का कम उपयोग करती हैं।

35 साल की मंजरी सिंह बताती हैं कि लोगोंं को सबसे अधिक लिट्टी-चोखा पसंद आता है। यही उनके किचन की जान भी है। भुने हुए चने के बेसन से वह लिट्टी तैयार करती हैं। इसके बाद चोखा तैयार किया जाता है। इसके लिए आलू, बैंगन, टमाटर आदि को पका कर अच्‍छे से मिलाया जाता है। इसमें कुछ घरेलू मसाले भी डाले जाते हैं। लिट्टी के साथ हमारे यहां तैयार किए गए चोखे को भी लोग खूब पसंद करते हैं।

हिरण्‍यमयी शिवानी बतातीं हैं, कि लाकडाउन के दौरान उन लोगों को बिहारी व्‍यंजन की काफी कमी खल रही थी। यही स्थिति आसपास रहने वाले और भी बिहारी लोगों की थी। इसी को ध्‍यान में रखते हुए बिहारी व्‍यंजनों के लिए ‘द छौक’ की शुरूआत की। शुरुआत में हर रोज 30 से 40 आर्डर आते थे, लेकिन अब 450 से 500 तक आर्डर आ रहे हैं। ग्राहक बढ़ने के बाद भी उनलोगों ने भोजन की गुणवत्‍ता को बरकरार रखा। आर्डर आने के बाद ही वे लोग भोजन तैयार करते हैं।

मंजरी सिंह बताती हैं, कि बिहारी खाना को हर कोई पसंद करता है। बस एक बार चखने की जरूरत है। और वह चाहती हैं कि देश-दुनिया में बिहारी व्‍यंजन लोकप्रिय हो। इसके लिए वह दिल्‍ली और एनसीआर के इलाके के अलावा पूणे, मुंबई, बंगलुरु, और जयपुर में आउटलेट्स खोलने पर काम कर रही हैं। इसके लिए तेजी से काम हो रहा है।