नवादा पुलिस ने छापेमारी कर कई शराब भट्ठियों को किया ध्वस्त,जानें शराबबंदी के बावजूद क्यों सामने आ रहे केस

बिहार के नवादा में अवैध शराब भट्ठियों को पुलिस ने एक बार फिर से ध्वस्त किया है. नगर थाना पुलिस ने यह कार्रवाई पचमुंखी नगर के महादलित टोले में की है. यहां पुलिस ने छापेमारी कर अवैध शराब बनाने वाले दो शराब भट्ठियों को ध्वस्त करते हुए कई लीटर शराब और शराब बनाने वाले उपकरणों को जब्त किया है. हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही काराबोरी मौके से फरार हो गए।

शराब कारोबारियों में मचा हड़कंप

मामला जिले के नगर थाना स्थित महादलित टोला का है. यहां पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर सघन छापेमारी कर दो शराब भट्ठियों को नष्ट किया. छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से किण्वित जावा, 20 लीटर महुआ शराब और शराब बनाने वाले कई उपकरणों को जब्त किया. पुलिस के द्वारा की गई इस छापेमारी से शराब कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

6 साल पहले लागू हुई थी शराब बंदी

बता दें कि बिहार सरकार ने साल 2005 में सरकार की शराब नीति को उदार किया था. इसके नतीजे में जहां सरकार के राजस्व में बेहताशा वद्धि दर्ज हुई थी, वहीं, शराब की दुकानों का सघन नेटवर्क भी तैयार हुआ था. शराब की आसानी से उपलब्धता और गांव के स्तर पर भी शराब की भठ्ठी खुलने के चलते राज्य में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था. जिसके बाद राज्य सरकार ने साल 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी. लेकिन शराबबंदी के बाद भी बिहार में मादक पदार्थों की मांग में बढ़त देखी गई है. इसके अलावे शराब तस्करी के केस भी आए दिन सामने आते रहते हैं।

शराबबंदी के बावजूद क्यों सामने आ रहे केस?

गौरतलब है कि बिहार की सीमा से झारखंड, यूपी. पं. बंगाल और नेपाल की सीमा सटी हुई है. राज्य के सात ज़िले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सहरसा, अररिया, किशनगंज नेपाल के साथ सटे हुए हैं. नेपाल के बारे में कहा जाता है- ‘सूरज अस्त, नेपाल मस्त’. जानकारी के मुताबिक पड़ोसी राज्य और देश में शराबबंदी लागू नहीं होने के चलते, बड़ी संख्या में बिहार के लोग इन राज्यों में शराब का सेवन करने आते-जाते रहते हैं. जबकि इन्हीं राज्यों से ज्यादातर शराब की तस्करी भी की जाती है।