कांग्रेस की युवा ब्रिगेड के इन दो ‘बुजुर्ग’ क्षत्रपों ने फीका किया BJP के जीत का जश्न

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के रुझान/परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जश्न मना रही थी. बीजेपी दफ्तरों में कार्यकर्ता मिठाइयां बांट रहे थे तो टीवी चैनलों के डिबेटे में पार्टी के नेता पूरे उत्साह के साथ सरकार बनाने की दावेदारी पेश कर रहे थे. तभी कांग्रेस ने जनता दल सेक्युलर (JDS) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देकर एक ऐसा राजनीतिक फैसला लिया कि बीजेपी का जश्न फीका पड़ गया. खबर आई की रुझानों से उत्साहित बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त रूप से इस जीत पर अपनी बात रखेंगे. लेकिन कांग्रेस की ओर से चले दांव के बाद बीजेपी ने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए. ऐसे में राजनीतिक गलियारे में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कांग्रेस के किस राजनेता ने बीजेपी की जीत के मंसूबे पर फानी फेर दिया है.

 

यूं तो राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद चर्चा शुरू हो गई थी कि वे अपनी टीम में युवा चेहरों को तवज्जो देंगे. हालांकि राहुल गांधी ने अपनी कोर टीम में कुछ वरिष्ठ चेहरों को ही रखना मुनासिब समझा था. राहुल गांधी का यह फैसला कर्नाटक में फायदे का साबित हो रहा है.

 

 

दरअसल, मतगणना से पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा हो सकते हैं. इसे देखते हुए राहुल गांधी ने पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद को मतगणना से एक ठीक एक दिन पहले ही बेंगुलरु भेज दिया था. पार्टी के ये दोनों नेता मतगणना शुरू होते ही एक्टिव मोड में आ गए. रुझानों में जब साफ हो गया कि कांग्रेस अब अकेले दम पर सरकार नहीं बना पाएगी, तभी गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत मिलकर किसी भी सूरत में बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए प्लानिंग में जुट गए.

 

 

बीजेपी खेमा बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने का जश्न मना रही थी, तभी गहलोत और आजाद ने जेडीएस के वरिष्ठ नेता एचडी देवगौड़ा और उनके बेट एचडी कुमारस्वामी से फोन पर बात कर ली. कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी की सलाह पर बिना वक्त गंवाए एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश कर दी. इसके साथ बीजेपी खेमे में खलबली मच गई.

 

 

मालूम हो कि गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत कांग्रेस के पुराने क्षत्रप हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस देशभर में उखड़ रही है, तभी आजाद और गहलोत ने अपनी राजनीतिक चातुर्य का परिचय दिया है. बिहार में महागठबंधन को बनाने में गुलाम नबी आजाद ने अहम रोल निभाया था, जिसके बाद यहां बीजेपी को हार मिली थी. वहीं अशोक गहलात ने गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार की पूरी प्लानिंग की थी, जिसके बाद यहां कांग्रेस बेहद मामूली अंतर से जीत पाई थी।

 

गोवा-मणिपुर से कांग्रेस ने लिया सबक

गोवा और मणिपुर में कांग्रेस बहुमत के सबसे करीब थी, लेकिन सरकार बनाने की दावेदारी पेश करने में देरी करने पर बीजेपी ने जोड़तोड़ कर सत्ता पर काबिज हो गई थी. इसी घटना से सबक लेते हुए इस बार कांग्रेस ने बिना समय गंवाए गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को पहले ही कर्नाटक भेज दिया था.

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