तमिलनाडू में मुख्यमंत्री पद के लिए जोड़-तोड़ में लगी शशिकला के सपने आज टूट गए। आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 4 साल की सज़ा दी। अब उन्हें न सिर्फ जेल जाना होगा, बल्कि वो 10 साल तक चुनाव लड़ने या कोई सार्वजनिक पद लेने के लिए अयोग्य भी हो गयी हैं।निचली अदालत में तुरंत करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला और बाकी 2 दोषियों को तुरंत निचली अदालत में समर्पण करने को कहा है। 21 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में तमिलनाडु की दिवंगत सीएम जयललिता मुख्य आरोपी थीं। उन पर आय से 66 करोड़ अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप था। शशिकला, सुधाकरन और इल्वरासी पर साज़िश में भागीदारी यानी आईपीसी की धारा 120 बी के तहत आरोप थे।

क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने ?

जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय की बेंच ने सीधे-सीधे कहा है कि हाईकोर्ट का जो फैसला था उसे हम खारिज कर रहे हैं और निचली अदालत के फैसले को हम बरकरार रख रहे हैं.आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ रखे गए सबूत पर्याप्त हैं। ये स्पष्ट है कि फर्जी कंपनियों के जरिए हेर-फेर किया गया। भ्रष्टाचार के इस मामले में सभी भागीदार थे। चूंकि, जयललिता अब इस दुनिया में नहीं है, इसलिए उनका मामला खत्म किया जाता है। बाकी तीनों दोषियों के लिए निचली अदालत का फैसला पूरी तरह से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जे जयललिता के पांच दिसंबर को हुए निधन को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ दायर सभी अपीलों पर कार्यवाही खत्म कर दी है.

21 साल पुराने इस मामले में मामले में बंगलुरु की विशेष अदालत का फैसला 27 सितम्बर 2014 को आया था। अदालत ने जयललिता को 4 साल की सज़ा देने के साथ ही उनपर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। शशिकला, इल्वारासी और सुधाकरन को 4 भी साल की कैद और 10-10 करोड़ जुर्माने की सजा मिली थी। 11 मई 2015 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने चारों को बरी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। जयललिता के खिलाफ दाखिल अपील को कोर्ट ने तकनीकी रूप से खत्म कर दिया है। इसलिए उन पर लगा 100 करोड़ का जुर्माना भी खत्म माना जाएगा।

शशिकला के खिलाफ केस क्या है?

ये मामला करीब 21 साल पुराना साल 1996 का है, जब जयललिता के खिलाफ आय से 66 करोड़ रुपये की ज्यादा की संपत्ति का केस दर्ज हुआ था. इस केस में जयललिता के साथ शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को भी आरोपी बनाया गया था. शशिकला के खिलाफ ये केस निचली अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है.

सुप्रीम कोर्ट से पहले इस केस में क्या क्या फैसले आए थे-

27 सितंबर 2014 को बेंगलूरु की विशेष अदालत ने जयललिता को 4 साल की जेल और 100 करोड़ रुपये का जुर्माना की सजा दी थी. इस केस में ही शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को भी चार साल की सजा सुनाई गई थी और 10-10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया था. फैसले के बाद चारों को जेल भी भेजा गया था. जिसके बाद विशेष अदालत के बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा था.

11 मई 2015 को हाईकोर्ट ने कर दिया था बरी–

11 मई 2015 को हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में चारों को बरी कर दिया था. हाईकोर्ट से जयललिता और शशिकला को बड़ी राहत तो मिली थी, लेकिन इसके बाद कर्नाटक की सरकार जयललिता की विरोधी पार्टी डीएमके और बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दे दी.

कर्नाटक सरकार इस मामले में इसलिए पड़ी, क्योंकि 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने केस को कर्नाटक हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था.

क्या है पनीरसेल्वम बनाम शशिकला विवाद ?

बता दें कि इसी साल पांच फरवरी को पार्टी की बैठक में तमिलनाडु के सीएम ओ पनीरसेल्वम ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था. AIADMK के विधायकों ने शशिकला को विधायक दल का नया नेता चुना था. पनीरसेल्वम के इस्तीफे के बाद शशिकला के सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया था. खुद पनीरसेल्वम ने सीएम पद के लिए शशिकला के नाम की पेशकश की थी.हालांकि बाद में पनीरसेल्वम ने बगावत कर दी और कहा कि जबरन उनसे इस्तीफा लिया गया था. पनीरसेल्वम की तरफ से बगावत के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई थी.

कौन हैं शशिकला ?

शशिकला के हाथों ही जयललिता का अंतिम संस्कार हुआ था. 80 के दशक में शशिकला जयललिता के संपर्क में आईं थी. उस वक्त शशिकला वीडियो कंपनी चलाती थीं. शशिकला ने जयललिता की सभाओं के भी वीडियो बनाए और धीरे-धीरे वो जयललिता की बेहद करीबी दोस्त बन गईं. एक वक्त ऐसा भी था कि जयललिता के हर फैसले के पीछे शशिकला का भी हाथ होता था.

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