ऋषभ पंत के बल्ले से भारत की बल्ले-बल्ले, ऑस्ट्रेलिया पर यादगार जीत

शुभमन गिल, ऋषभ पंत और चेतेश्वर पुजारा की शांत, संयत और ज़िम्मेदारीपूर्ण पारी के कारण भारत ने ब्रिसबेन के चौथे टेस्ट में मेज़बान ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ यादगार जीत दर्ज की है.

इसी के साथ चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ भारत ने 2-1 से जीत ली है और बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफ़ी पर भारतीय टीम का क़ब्ज़ा रहा.

ब्रिसबेन में हुए चौथे टेस्ट में भारत को जीत के लिए 328 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे भारत ने पूरा कर लिया.

चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ का पहला टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने जीता था और दूसरा भारत ने. जबकि तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा था.

पहले शुभमन गिल, फिर चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत ने भारत को जीत दिलाने की कोशिश जारी रखी, लेकिन उन पर हार बचाने का भी दबाव था.

रोहित शर्मा के सस्ते में सात रन बनाकर आउट हो जाने के बाद शुभमन गिल और चेतेश्वर पुजारा ने दूसरे विकेट के लिए 114 रन जोड़े.

उस समय ऐसा लग रहा था कि भारत पूरे नियंत्रण में है. लेकिन शानदार बल्लेबाज़ी कर रहे शुभमन गिल दुर्भाग्यशाली रहे और शतक से चूक गए.

वे 91 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद पुजारा और कप्तान अजिंक्य रहाणे पर ज़िम्मेदारी आ गई. रहाण ने आक्रामक रुख़ दिखाया और 22 गेंदों पर 24 रनों की पारी में एक चौका और एक छक्का भी लगाया.

लेकिन कमिंस की गेंद पर वे आउट हो गए. इसके बाद भारतीय टीम दबाव में आ गई और भारतीय बल्लेबाज़ थोड़े रक्षात्मक हो गए.

पुजारा और पंत पर ज़िम्मेदारी सिर्फ़ रन बनाने की नहीं थी बल्कि हार बचाने की भी थी. चायकाल के बाद उन्होंने तेज़ी से रन बटोरने की कोशिश भी की.

पुजारा का विकेट उस समय गिरा, जब भारत को जीत के लिए 100 रन और बनाने थे. पुजारा ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की उठती तेज़ गेंदों का अच्छे से सामाना किया लेकिन 56 रन बनाकर आउट हो गए.

उन्होंने 211 गेंदों का सामना किया और अपनी पारी में सात चौके लगाए. मयंक अग्रवाल भी कुछ ख़ास नहीं कर पाए और नौ रन बनाकर पवेलियन लौट गए.

लेकिन दूसरे छोर पर ऋषभ पंत डटे रहे और कई आकर्षक शॉट्स लगाए. पंत की बल्लेबाज़ी को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि शायद भारत ये मैच जीत जाए.

पंत और वॉशिंगटन सुंदर ने शानदार साझेदारी की और भारत को जीत के दरवाज़े तक ले गए. भारत को जीत के लिए जब 10 रन चाहिए थे, उस समय वॉशिंगटन सुंदर 22 रन बनाकर आउट हो गए.

शार्दुल ठाकुर भी दो रन बनाकर चलते बने. लेकिन पंत ने मोर्चा संभाले रखा और भारत को एक बेहतरीन और लंबे समय तक याद रखी जाने वाली जीत दिलाई.

पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 369 रन बनाए थे, जबकि भारतीय टीम 336 रन ही बना सकती थी. इस तरह पहली पारी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया को 33 रनों की बढ़त मिली थी.

दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 294 रन बनाए और भारत को जीत के लिए 328 रनों का लक्ष्य दिया.

ख़ास प्रदर्शन

इस टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में लाबुशेन का शतक यादगार रहा. एक समय ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट 87 रन पर गिर गए थे. लेकिन लाबुशेन के 108 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया 369 रन बना सका. कप्तान टिम पेन ने भी 50 रन बनाए.

भारत की ओर से शार्दुल ठाकुर, नटराजन और वॉशिंगटन सुंदर ने तीन-तीन विकेट लिए.

भारत की पहली पारी कम अनुभवी खिलाड़ियों के योगदान के कारण याद किया जाएगा. शीर्ष क्रम के कोई ख़ास प्रदर्शन न कर पाने की वजह से भारत के छह विकेट 186 रन पर गिर गए थे.

लेकिन शार्दुल ठाकुर और वॉशिंगटन सुंदर ने गेंद के बाद बल्ले से मोर्चा संभाला और सातवें विकेट के लिए 123 रनों की अहम साझेदारी की.

शार्दुल के 67 और वॉशिंगटन सुंदर के 62 रनों की बदौलत भारत 300 पार कर पाया और 336 रन बनाकर टीम आउट हुई. अगर ये दोनों खिलाड़ियों का बल्ला नहीं चलता तो ऑस्ट्रेलिया की बढ़त और ज़्यादा होती और भारत के लिए मैच बचाना और मुश्किल होता. ऑस्ट्रेलिया की ओर से हेज़लवुड ने पाँच विकेट लिए.

ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी मोहम्मद सिराज और शार्दुल ठाकुर की गेंदबाज़ी के कारण ज़्यादा चर्चित रही. स्टीव स्मिथ ने ज़रूर 55 रनों की पारी खेली.

लेकिन टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में पहली बार पाँच विकेट लेने वाले सिराज चर्चा का केंद्र रहे. उनका बेहतरीन साथ निभाया शार्दुल ठाकुर ने. पहली पारी में तीन विकेट लेने वाले शार्दुल ने इस पारी में चार विकेट लिए.

ऑस्ट्रेलिया की टीम 294 रन पर आउट हुई. भारत की दूसरी पारी शुभमन गिल, ऋषभ पंत, चेतेश्वर पुजारा के कारण याद की जाएगी. जब इन बल्लेबाज़ों ने शांत और संयत तरीक़े से जीत की इबारत लिखी.

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