LJP के इंकार से RJD का दांव फेल, सुशील मोदी का निर्विरोध राज्यसभा जाना लगभग तय

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर एनडीए प्रत्याशी सुशील कुमार मोदी की ताजपोशी तय मानी जा रही है। उनके निर्विरोध रास जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। उप चुनाव के लिए नामांकन का गुरुवार यानी 3 दिसम्बर को आखिरी दिन है। लेकिन, अभी तक एनडीए के अलावा अन्य किसी दल से उम्मीदवार तय भी नहीं हुए हैं। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की मां रीना पासवान को प्रत्याशी बनाने का विपक्ष का दांव परवान नहीं चढ़ सका है। ऐसे में श्री मोदी को वॉकओवर मिलने की स्थिति बन गई है।

एनडीए में भाजपा कोटे की सीट पर पार्टी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर दांव लगाया है। राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन ने दलित कार्ड खेलने का प्रयास किया था। इस मामले में राजद लोजपा की नाराजगी को भी भुनाना चाहता था। राजद के प्रदेश प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा था कि दलित नेता रामविलास पासवान जी की सीट पर लोजपा का अधिकार है। उनकी पत्नी रीना पासवान के प्रत्याशी बनने पर पार्टी बिना शर्त समर्थन करेगी। हालांकि तीन दिन की चुप्पी के बाद लोजपा ने मंगलवार को राजद का आभार जताते हुए इस मामले का पटाक्षेप कर दिया। दूसरी ओर, भाजपा सहित एनडीए खेमा भी विपक्षी कैंप पर नजरें गड़ाए रहा कि महागठबंधन से कोई प्रत्याशी मैदान में आता है या नहीं।

दलित चेहरा उतारने की थी चर्चा
राजद खेमा रीना पासवान पर दांव लगाना चाहता था। उनके तैयार न होने की स्थिति में किसी दलित चेहरे को मैदान में उतारने की चर्चा थी ताकि भाजपा और जदयू को दलितों के बीच घेरा जा सके। हालांकि लोजपा के रीना पासवान के नाम पर कदम पीछे खींचने के बाद पूर्व मंत्री श्याम रजक का नाम चर्चा में जरूर आया, मगर फैसले की स्थिति तक नहीं पहुंच सका। सूत्रों का कहना है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी रीना पासवान के नाम पर ही सहमति दी थी। इन सब हालात में एनडीए प्रत्याशी की राह लगभग निष्कंटक होती दिख रही है। मालूम हो कि बिहार विधानसभा में 40 दलित विधायक हैं।

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