अब डेली ड्रग रेजिमेन के तहत बुधवार से प्रतिदिन टीबी से ग्रसित मरीजों को दवा दी जाएगी। जो चिकित्सक और दवा दुकानदार दवा रखना चाहेंगे उन्हें भी डॉट्स के तहत दवा की आपूर्ति की जाएगी। इन क्लीनिकों और दवा दुकानों से मरीजों को निश्शुल्क दवा दी जाएगी। वजन के हिसाब से दवा बनाई गई है। जो बच्चे टीबी से ग्रसित हैं उन्हें पानी में घुलने वाली दवा दी जाएगी। मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के मेडिसीन विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता में टीबी एंड चेष्ट विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह ने दी।

हवादार कमरा में रहें टीबी मरीज

टीबी माईकोबेकटेरियम जीवाणु से होती है। मरीज को हवादार कमरा में रहना चाहिए। बंद कमरा में रहने से जब रोगी खांसता है तो जीवाणु छोटे कणों के रुप में हवा में फैलते हैं। स्वस्थ्य व्यक्ति भी टीबी से ग्रसित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा टीबी के मशीन हैं। 1962 में राष्ट्रीय यक्ष्मा नियंत्रण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। टीबी क्लीनिक एवं जिला यक्ष्मा केंद्र की स्थापना की गई। एक्सरे एवं बलगम की जांच प्रारंभ की गई। टीबी मरीज को छह से आठ माह तक दवा खाना आवश्यक है। बीच में दवा खाना छोड़ने से एमडीआर टीबी होने की संभावना रहती है।

टोल फ्री नंबर 18001022248 डायल करें मरीज

टीबी की नई दवा के पैकेट में टोल फ्री नंबर 18001022248 दिया गया है। दवा खाने के बाद मिस्ड कॉल करने पर साफ्टवेयर में मरीज का डेटा ग्रीन या रेड लाइट दर्शाया जाएगा। रेड लाइट जलने पर टीबी ट्रीटमेंट के सपोर्टर उस मरीज के घर जाकर पता करेंगे। इस अवसर पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल, डॉ. केडी मंडल, आइएमए अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार, डॉ. आरके सिन्हा, डॉ. वरुण ठाकुर, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. विनय झा, डॉ. अमित कुमार के अलावा इंद्रजीत, प्रदीप सहित कई लोग उपस्थित थे।

एमडीआर टीबी से 54 मरीजों की मौत
जेएलएनएमसीएच में 2013 से टीबी मरीजों की जांच की जा रही है। आठ जिलों के अबतक 707 एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज किया गया। इनमें 54 मरीजों की मौत हो गई।

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