शिक्षकों की आवाज दबने से भी नहीं दबेंगे। नीतीश जी इन्हीं के टेंशन में बीमार हो गए। लेकिन, उनसे मेरी सलाह है कि शिक्षकों के मामले में जो कुछ भी होने वाला है या जो कोई भी टीचरों के बारे में बोलने वाले हैं। उसका असर आप पर ही होने वाला है। ऐसे में इतना भी वजन मत लीजिए की आप बीमार हो गए हैं। यदि आपको ठीक होना है तो के के पाठक के खिलाफ कार्रवाई करें और जो शिक्षकों का मौलिक अधिकारों का हनन करता है उसे तुरंत बर्खास्त करें।

वहीं, नवल किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार शिक्षा में सुधार कर रहे हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन शिक्षा को बिगड़ने का काम भी नीतीश कुमार ने किया था। गाली देने से शिक्षा में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है। महागठबंधन वाले छाती पीट रहे थे कि संविधान को खतरा है। लेकिन, अब खतरा शिक्षकों को है। अब टीचरों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। ऐसे में संविधान के मौलिकअधिकारों का दुहाई देने वाले कहां गए। अगर ठीक से संशोधन नहीं हुआ तो नीतीश कुमार के ईट से ईट बजा देंगे।

उधर, नवल किशोर ने शिक्षा मंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि- शिक्षा मंत्री को पता है कि नहीं। नीतीश कुमार आप याद कीजिए, जब आप बिहार में यात्रा कर रहे थे तो लड़की आपको काला दुपट्टा मुंह पर फेंक रही थी। आप परेशान रहते थे। पने हमारे संस्कृतियों के खिलाफ छुट्टी कैंसल किया है और अब आप हमारे शिक्षक को प्रताड़ित कर रहे हैं। सरकार ने जल्द से जल्द फैसले को दुरुस्त नहीं किया तो हम लोग सरकार को दुरुस्त करेंगे।


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